Bihar Chunav: पटना में दौड़ा-दौड़ाकर मारे गए राजकुमार राय, क्या बिगाड़ सकते थे RJD का खेल?

Bihar Chunav: पटना में जमीन कारोबारी और पूर्व आरजेडी नेता राजकुमार राय उर्फ आला राय की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी. राघोपुर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे राय को बदमाशों ने दौड़ा-दौड़ाकर छह गोलियां मारीं. उनकी हत्या से सियासत गरमा गई है और पुलिस जांच में जुटी है.

पटना: बुधवार की रात हुए एक सनसनीखेज वारदात ने बिहार की राजनीति को हिला दिया. जमीन कारोबारी और आरजेडी के पूर्व नेता राजकुमार राय उर्फ आला राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई. बताया जा रहा है कि अपराधियों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर छह गोलियां मारीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. वारदात पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल के पास मुन्नाचक रोड नंबर 17 पर हुई.


राजकुमार राय उर्फ आला राय की हत्या ने सिर्फ पटना ही नहीं बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है. वजह साफ है- आला राय राघोपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे. यह वही सीट है जो आरजेडी का गढ़ मानी जाती है और जिसे यादव परिवार की प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है.


राघोपुर से चुनाव लड़ने की तैयारी
राजकुमार राय वैशाली जिले के मीरमपुर के रहने वाले थे. राजनीति और जमीन कारोबार, दोनों में उनकी सक्रियता रही. वे आरजेडी के जिला अध्यक्ष भी रह चुके थे. हाल ही में उन्होंने पार्टी से दूरी बनाई थी और इस बार राघोपुर विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. यह वही सीट है, जहां से आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव चुनाव जीतते आ रहे हैं.

कैसे हुई हत्या?
घटना की रात राय अपने ड्राइवर के साथ घर लौट रहे थे. घर पहुंचने से पहले वे पास की दुकान से मसाला खरीदने उतरे. तभी पहले से घात लगाए दो हमलावरों ने उन पर गोली चला दी. शुरुआत में एक गोली दुकान के फ्रिज पर लगी, लेकिन इसके बाद अपराधियों ने पीछा कर ताबड़तोड़ फायरिंग की. राय को छह गोलियां लगीं और वे मौके पर ढेर हो गए. पुलिस ने घटनास्थल से छह खोखा बरामद किया है और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है.

हत्या का राजनीतिक कनेक्शन
इस हत्या को राजनीतिक एंगल से भी देखा जा रहा है. राघोपुर आरजेडी का गढ़ माना जाता है. 2015 और 2020 दोनों चुनावों में तेजस्वी यादव ने यहां से जीत दर्ज की है और लगातार 48-49% वोट शेयर बनाए रखा है. इससे पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. 2010 में भले ही आरजेडी को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन फिर से यह सीट यादव परिवार के पास लौट आई.


तेजस्वी को चुनौती?
राजकुमार राय का राघोपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान सीधे-सीधे तेजस्वी यादव की चुनौती मानी जा रही थी. स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि उनकी सक्रियता से आरजेडी का समीकरण बिगड़ सकता था. यही वजह है कि उनकी हत्या को राजनीतिक साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है.


किसे हो सकता था नुकसान?
अगर राय मैदान में उतरते तो वोटों का बंटवारा होना तय था. इससे सबसे ज्यादा नुकसान आरजेडी को हो सकता था, क्योंकि आला राय का आधार उन्हीं इलाकों में था जहां आरजेडी परंपरागत रूप से मजबूत है. ऐसे में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को अप्रत्यक्ष फायदा मिलता. राजकुमार राय की हत्या ने यह साफ कर दिया है कि आने वाला विधानसभा चुनाव न सिर्फ विकास या जातिगत समीकरण पर लड़ा जाएगा, बल्कि अपराध और राजनीतिक साजिश भी बड़ा मुद्दा बनेगी.

Source of News:- news18.com


जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इस वारदात ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति और अपराध का रिश्ता अभी भी गहराई से जुड़ा हुआ है. सवाल यह भी है कि क्या आला राय की हत्या महज जमीन कारोबार का विवाद है या फिर इसके पीछे राघोपुर की सियासत छिपी है.

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