‘मैट्रिक फेल, मर्डर केस में गए जेल’, सम्राट चौधरी के ‘नकली’ नाम को लेकर भी यह क्या बोल गए प्रशांत किशोर?

Prashant Kishor : प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर साल 1998 में कांग्रेस नेता सदानंद सिंह की बम से उड़ाकर हत्या करने का आरोप लगाया. कहा- सम्राट के परिवार से उनकी राजनीतिक दुश्मनी थी.

जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीति कार प्रशांत किशोर ने शुक्रवार (19 सितंबर) को बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने आश्चर्य जताया कि सम्राट चौधरी ने दसवीं की परीक्षा पास किए बिना डी-लिट की डिग्री प्राप्त की. किशोर ने कहा कि यह राज्य की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए गंभीर चुनौती है.

प्रशांत किशोर ने जदयू के राष्ट्रीय महा सचिव और राज्य मंत्री अशोक चौधरी पर पिछले तीन वर्षों में कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये की जमीन संदिग्ध और अवैध तरीके से खरीदने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार के कुछ नेता भ्रष्ट आचरण में लिप्त हैं. किशोर ने कहा कि ये मुद्दे आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान जनता के ध्यान में आने चाहिए.

सदानंद सिंह के मर्डर में सम्राट चौधरी को हुई थी जेल
किशोर ने सम्राट चौधरी के राजनीतिक और कानूनी इतिहास का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सम्राट चौधरी का असली नाम सम्राट कुमार मौर्य है. 1998 में उन पर कांग्रेस नेता सदानंद सिंह को बम से उड़ाने का आरोप लगा था। सदानंद सिंह सहित छह लोगों की हत्या के भी आरोप लगे थे. तब वे खुद को नाबालिग बताकर जेल से बाहर आए। इस घटना के कुछ समय बाद वे बिना विधानसभा या विधान परिषद सदस्य बने मंत्री थे. छह महीने जेल में रहने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.

शैक्षिक प्रमाण और सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे
किशोर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सम्राट चौधरी ने अपने मैट्रिक (दसवीं) परीक्षा के नंबर प्रस्तुत किए, जिसमें उन्होंने 234 अंक प्राप्त किए और फेल हुए. 2010 में दिए गए हलफनामे में भी सम्राट चौधरी ने खुद को 7वीं पास बताया. किशोर ने इस तथ्य को राज्य की राजनीतिक और शैक्षिक पारदर्शिता के लिए गंभीर मुद्दा बताया.

Source of News:- abplive.com

चुनाव से पहले राजनीतिक हमला
इस बयान के माध्यम से किशोर ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए सरकार के नेताओं पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके चुने हुए नेता कितने योग्य और पारदर्शी हैं. उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार, जमीन सौदे और नेताओं की योग्यता पर खुला सवाल उठाने की आवश्यकता बताई.

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