इंदौर में कैसे हुई 14 लोगों की दर्दनाक मौत? लैब रिपोर्ट आने के बाद साफ हुआ पूरा मामला

मध्य प्रदेश के इंदौर में उल्टी-दस्त की महामारी से 13 लोगों की मौत गंदा पानी पीने के कारण हुई। लैब रिपोर्ट में भागीरथपुरा इलाके की पानी की पाइपलाइन में रिसाव की पुष्टि हुई है। सप्लाई में गंदा पानी होने की वजह से 1400 से ज्यादा लोग बीमार पड़े।

इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दस्त और उल्टी की महामारी फैलने की वजह पीने का पानी गंदा होना निकला है। एक लैबोरेटरी जांच ने इसकी पुष्टि कर दी है। इस महामारी से कम से कम 14 मरीजों की मौत हो चुकी है और 1400 से ज्यादा लोग बीमार पड़ चुके हैं। बता दें कि इंदौर पिछले 8 सालों से लगातार भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना जाता रहा है, ऐसे में पीने के दूषित पानी से हुई मौतों ने लोगों को हैरान कर दिया है। चिंता की बात यह है कि अभी भी दर्जनों लोगों को हालत गंभीर होने की वजह से आईसीयू में रखा गया है।

‘भागीरथपुरा इलाके से महामारी की शुरुआत हुई’
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी कि CMHO डॉक्टर माधव प्रसाद हसानी ने गुरुवार को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में साफ हुआ है कि भागीरथपुरा इलाके में पीने का पानी पाइपलाइन में रिसाव की वजह से गंदा हो गया था। इसी इलाके से महामारी की शुरुआत हुई है। डॉक्टर हसानी ने रिपोर्ट के नतीजे विस्तार से नहीं बताए। अधिकारियों का कहना है कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पानी की पाइपलाइन में रिसाव पाया गया था। उस जगह के ठीक ऊपर एक शौचालय बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि इसी रिसाव से इलाके के पानी की सप्लाई गंदी हो गई।

‘पीने से पहले पानी को अच्छी तरह उबाल लें’
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया, ‘हम भागीरथपुरा की पीने के पानी की पाइपलाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि पता चले कि कहीं और भी रिसाव तो नहीं है।’ उन्होंने कहा कि जांच के बाद गुरुवार को पाइपलाइन से घरों में साफ पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है, लेकिन सावधानी के तौर पर लोगों को सलाह दी गई है कि पीने से पहले पानी को अच्छी तरह उबाल लें। दुबे ने कहा, ‘हमने इस पानी के सैंपल भी लिए हैं और जांच के लिए भेज दिए हैं।’ भागीरथपुरा में पानी की इस त्रासदी से सबक लेते हुए उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राज्य में एक मानक संचालन प्रक्रिया या SOP जारी की जाएगी।

Source of News:- indiatv.in

‘गुरुवार को भागीरथपुरा के 1714 घरों का सर्वे’
दुबे ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर भागीरथपुरा का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा के 1714 घरों का सर्वे किया गया जिसमें 8571 लोगों की जांच की गई। इनमें से 338 लोगों को उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण थे, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक इलाज दिया गया। उन्होंने कहा कि महामारी शुरू होने के 8 दिनों में कुल 272 मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया जिनमें से अब तक 71 को छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर होने से ICU में रखा गया है।

Related Posts

MP में 9 बच्चों की मौत के बाद Coldrif कफ सिरप की बिक्री पर बैन, CM मोहन यादव बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

Coldrif Cough Syrup Ban: छिंदवाड़ा में Coldrif कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मध्य प्रदेश में इस सिरप और कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *