Jagdeep Dhankhar News: जब खुद ही जगदीप धनखड़ को हटाना चाहती थी कांग्रेस, फिर इस्तीफे पर यह विलाप क्यों?

Jagdeep Dhankhar News:जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर कांग्रेस का विलाप, पहले अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली पार्टी अब उनकी प्रशंसा कर रही है. विपक्ष ने उन पर पक्षपात का आरोप लगाया था, अब स्वास्थ्य कारणों पर राजनीति कर रही है.

Jagdeep Dhankhar News: उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के कारण सियासी माहौल गर्म है. उनके इस्तीफे के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है. विपक्ष का कहना है कि धनखड़ ने किसी न किसी दबाव में इस्तीफा दिया है. विपक्षी नेता धनखड़ के साथ सहानुभूति जता रहे हैं. वे उन्हें महान व्यक्ति बता रहे हैं. लेकिन, ये वही नेता हैं जो चंद महीने पहले तक धनखड़ पर पक्षपात का आरोप लगा रहे थे. वे सत्ता पक्ष को ज्यादा समय देने की बात कहते थे.


हद तो तब हो गई जब विपक्ष ने जगदीप धनखड़ के खिलाफ बीते साल 10 दिसंबर को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को सौंप दिया था. इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के लगभग 60 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे. विपक्ष ने धनखड़ पर सदन में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया था. हालांकि 19 दिसंबर को उपसभापति हरिवंश ने इस प्रस्ताव को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया, क्योंकि इसे पेश करने के लिए आवश्यक 14 दिन का नोटिस नहीं दिया गया था. यह भारत के संसदीय इतिहास में पहला मौका था जब किसी उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया.

अब कांग्रेस कर रही प्रशंसा
इस अविश्वास प्रस्ताव में सबसे आगे दिखी कांग्रेस पार्टी और उसके नेता अब खुद धनखड़ की प्रशंसा कर रहे हैं. दरअसल, धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से सोमवार रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कांग्रेस ने दावा किया कि जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के पीछे उनके द्वारा बताए गए स्वास्थ्य कारणों के अलावा कोई और अधिक गहरे कारण हैं. कांग्रेस ने कहा कि धनखड़ का इस्तीफा उनके बारे में बहुत कुछ कहता है और साथ ही यह उन लोगों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि धनखड़ ने सोमवार को अपराह्न साढ़े 12 बजे राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति की अध्यक्षता की थी.

कांग्रेस ने कहा कि सोमवार अपराह्न एक बजे से शाम साढ़े चार बजे के बीच कुछ बहुत गंभीर घटित हुआ था कि केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा और किरेन रीजीजू कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में नहीं पहुंचे थे. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि धनखड़ मानदंडों, मर्यादाओं एवं नियमों के प्रति बेहद सजग थे और उनका मानना था कि उनके कार्यकाल में इन नियमों की लगातार अवहेलना की जा रही थी.

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धनखड़ ने किसानों की बात की

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि धनखड़ ने हमेशा 2014 के बाद के भारत की तारीफ की, लेकिन साथ ही किसानों के हितों के लिए खुलकर आवाज उठाई. उन्होंने सार्वजनिक जीवन में बढ़ते अहंकार की आलोचना की और न्यायपालिका की जवाबदेही व संयम की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने जहां तक संभव हो सका, विपक्ष को जगह देने की कोशिश की.


अब सवाल उठता है कि अगर धनखड़ इतने अच्छे तो कांग्रेस पार्टी ने दिसंबर में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया. क्या उस वक्त धनखड़ खराब थे और अब अच्छे हो गए हैं. यह कांग्रेस पार्टी की दोहरे रवैये को दिखा रहा है. अब वह उनके इस्तीफे पर कोरा विलाप कर रही है. स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने वाले धनखड़ के मसले पर भी वह राजनीति कर रही है

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