जस्टिस यशवंत वर्मा को लगा तगड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट से स्पीकर के खिलाफ याचिका खारिज, अब होगा एक्शन

Justice Yashwant Varma News: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. लोकसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. जब का यह कैश कांड है, तब जज यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे. अब उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गाय है.

Justice Yashwant Varma News: कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कैश कांड में सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी शुक्रवार को जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज कर दी. जस्टिस वर्मा ने अपनी याचिका में लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी थी. लोकसभा अध्यक्ष ने जस्टिस वर्मा को हटाने और जज एक्ट 1968 के तहत एक जांच समिति गठित करने के प्रस्ताव को स्वीकार किया था.


दरअसल, ‘कैश कांड’ मामले में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के लिए संसद में चल रही कार्यवाही से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों ही सुनवाई पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दोनों पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करने को कहा था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया.


याचिका में क्या मांग की थी?

बीते दिनों जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी के सामने पेश होने की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की थी. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी यह मांग ठुकरा दी. जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर की ओर से बनाई गई तीन सदस्यीय समिति को चुनौती दी.

जज यशवंत वर्मा की क्या दलील
जस्टिस यशवंत वर्मा का कहना था कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत किसी जज को हटाने की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है जब दोनों सदन, यानी लोकसभा और राज्यसभा, प्रस्ताव को स्वीकार करें और उसके बाद एक संयुक्त समिति बनाई जाए. लेकिन इस मामले में सिर्फ लोकसभा ने प्रस्ताव पारित किया है, जबकि राज्यसभा में यह अभी लंबित है. इसलिए सिर्फ लोकसभा स्पीकर द्वारा समिति बनाना कानून के खिलाफ है.


जस्टिस वर्मा का यह भी कहना था कि 21 जुलाई को जब उनके खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया था, तब आगे की जांच के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति बननी चाहिए थी. केवल लोकसभा की तरफ से समिति बनाना प्रक्रिया में गड़बड़ी है.


क्या है जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड
जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज हैं. जब का यह कैश कांड है, तब वह दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे. जज यशवंत वर्मा दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में 14-15 मार्च 2025 की रात आग लग गई थी. आग बुझाने के दौरान फायर सर्विस को स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां मिलीं, जिनके वीडियो भी वायरल हुए. उस वक्त जस्टिस वर्मा बंगले में मौजूद नहीं थे और उनकी पत्नी ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी. जांच में यह कैश अनएकाउंटेड बताया गया.

Source of News:- news18.com


फिर इलाहाबाद भेजे गए जज वर्मा
इस कैश कांड घटना के एक हफ्ते बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया, जहां फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है. अब सुप्रीम कोर्ट से मिले झटके के बाद उन पर महाभियोग की कार्रवाई होगी.

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