UGC Equity Regulations 2026 | Supreme Court Pauses implementation of new UGC rules: यूजीसी के नए नियमों पर अब रोक लग गई है. सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को हाल ही में लागू हुए UGC इक्विटी नियमों पर रोक लगा दी और इन्हें अस्पष्ट बताया. कोर्ट ने जोर दिया कि भारत की एकता सभी शैक्षणिक संस्थानों में दिखनी चाहिए. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें आज़ादी मिले 75 साल गुज़र चुके हैं और हम जातिगत भेदभाव से अभी भी जूझ रहे हैं.
Supreme Court Stays UGC New Rules: यूजीसी यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के नए नियमों पर रोक लग गई है. सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों पर बड़ा फैसला सुनाया और यूजीसी की नई गाइडलाइन्स पर तत्काल रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने UGC के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताते हुए स्थगित कर दिया. चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि इस नियम को स्पष्ट करने की जरूरत है. तब तक 2012 के पुराने UGC नियम लागू रहेंगे. कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की.
दरअलस, यूजीसी के नए नियमों पर बीते कुछ दिनों से बवाल जारी है. सवर्ण तबके के स्टूडेंट्स इन नियमों का विरोध कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी बुधवार को ही यूजीसी नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए हामी भरी ती. याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव पैदा कर सकते हैं. मामला राहुल देवन और अन्य बनाम केंद्र सरकार है. सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका को सुनवाई के लिए आज लिस्ट किया था.
सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?
दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने UGC प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर रोक लगा दी है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कहा कि ये प्रावधान पहली नज़र में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया. सीजेआई सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को रेगुलेशंस को फिर से बनाने के लिए कहा है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है. अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब देने को कहा है.
UGC नियमों के खिलाफ याचिका में क्या है?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2021’ को चुनौती दी गई है. यूजीसी के मुताबिक, ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए बने हैं, मगर याचिका में आरोप लगाया गया है कि जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा सिर्फ एससी/एसटी/ओबीसी तक सीमित है. इससे जनरल कैटेगरी के छात्र शिकायत निवारण तंत्र से वंचित रह सकते हैं. यूजीसी नियमों के खिलाफ कई याचिकाएं और एप्लीकेशन कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं.
यूजीसी के नए नियम क्या हैं
यूजीसी की ओर से देश भर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं को रैगिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने का स्पष्ट निर्देश है. यूजीसी के मुताबिक, देशभर के इन सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्ती से एंटी रैगिंग गाइडलाइंस लागू करना अनिवार्य है. तय नियमों के दायरे में यूजीसी ने रैगिंग रोकने के लिए कड़े नियम बनाए हैं. यूजीसी के अनुसार देशभर के जो भी उच्च शिक्षण संस्थान इन नियमों को लागू करने में असफल रहे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. यूजीसी का कहना है कि किसी उच्च शिक्षा संस्थान में रैगिंग और आत्महत्या जैसा मामला सामने आना बेहद गंभीर है. ऐसे मामले में गहन जांच की जाएगी और संबंधित विश्वविद्यालय को इसके लिए समन किया जाएगा.
यूजीसी का नियमों पर क्या है यूजीसी का तर्क
यूजीसी का कहना है कि ये नियम यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं. नियमों के मुताबिक हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी. ये कमेटी एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतें सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी. कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है. कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए योजनाएं लागू करना है.
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आखिर यूजीसी के नियमों का क्यों हो रहा है विरोध
यूजीसी के नए नियमों का विरोध सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी के छात्र कर रहे हैं. उनका आरोप है कि ये नियम सवर्णों के खिलाफ हैं. नियमों में सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की बात है. जनरल कैटेगरी के छात्रों को भेदभाव का शिकार माना ही नहीं गया है जिसको लेकर विरोध हो रहा है. सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि इन नियमों का फायदा उठाकर कोई भी छात्र सवर्णों को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हो चुकी है. याचिका में कहा गया है कि ये UGC एक्ट और उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ है. विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे भेदभाव कम नहीं, बल्कि ज्यादा हो सकता है.






