एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एनएचएआई ने आदेश के अनुसार एसओपी तैयार कर ली है और उनका कहना है कि 1400 किमी का संवेदनशील क्षेत्र है, जिसकी देखभाल राज्य सरकार को करनी है.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई की और कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज दुर्घटना का शिकार हुए हैं और एक जज अभी भी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं.
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई शुरू करते हुए कहा, ‘आज हम सबको समय देंगे. किसी को शिकायत न रहे कि उसे नहीं सुना गया. पहले पीड़ितों को सुनेंगे, फिर डॉग लवर्स को.’
कोर्ट ने कहा कि सड़क पर आवारा पशुओं की मौजूदगी से पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज दुर्घटना का शिकार हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर, 2025 को शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे स्टेशन और अस्पतालों जैसे पब्लिक प्लेस में कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई थी और निर्देश दिया था कि कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित कर दिया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा था कि पकड़े गए आवारा कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने राज्य राजमार्गों, नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का भी निर्देश दिया था. आज सुनवाई में एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने इस मामले में रिपोर्ट पेश की. उन्होंने कोर्ट में कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को एसओपी तैयारी करने के लिए कहा गया था और उन्होंने एसओपी तैयार कर ली है. गौरव अग्रवाल ने बताया कि एनएचएआई का कहना है कि 1400 किलोमीटर का संवेदनशील क्षेत्र है, जिसकी देखभाल राज्य सरकार को करनी होगी.
एमिकस ने बताया कि राज्य कोर्ट के आदेश के पालन का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शेल्टर होम और स्टरलाइजेशन सेंटर का अभाव है. उन्होंने बताया कि आदेश के अनुसार मवेशियों और आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखने का निर्देश दिया गया है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जाना होगा. उन्होंने कहा कि AWB का कहना है कि मेल डॉग्स को पहले स्टेरलाइज किया जाए, ताकि प्रजनन को रोका जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि एबीसी सेंटर में भी मैन पावर की जरूरत होगी. राज्यों को भी हलफनामे दाखिल करने थे और अभी तक 10 एफिडेविट मिले हैं.
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कोर्ट ने इस पर पूछा कि किन राज्यों ने हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं, एमिकस क्यूरी ने बताया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब जैसे बड़े राज्यों ने दाखिल नहीं किए हैं, साथ ही सिक्किम जैसे छोटे राज्य भी इनमें शामिल हैं.







