UGC New Rule 2026, UGC Protest 2026: देश भर में यूजीसी के नए नियमों का विरोध हो रहा है. इन नियमों को लेकर सवर्ण समाज के युवा काफी गुस्से में हैं. यूजीसी मुख्यालय से लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. आइए समझते हैं कि नए नियमों में कैसे कैसे प्रावधान किए गए हैं? आखिर इन नियमों में ऐसा क्या है जिससे जनरल कैटेगरी के लोगों में नाराजगी है.
UGC New Rule 2026, UGC Protest 2026: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने एक नया नियम जारी किया है -Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026. ये नियम कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन इनके आने के बाद से सवर्ण यानी जनरल कैटेगरी में भारी गुस्सा है. दिल्ली में UGC ऑफिस के बाहर प्रोटेस्ट हो रहे हैं.सोशल मीडिया पर #UGCRollback ट्रेंड कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट में भी PIL दाखिल हो चुकी है. लोग कह रहे हैं कि ये नियम रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं. आइए समझते हैं नियम क्या हैं, क्यों लाए गए और विरोध क्यों हो रहा है?
नियम कब और क्यों आए?
UGC ने ये नियम 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई किए जो तुरंत लागू हो गए.इन्हें पुराने 2012 के नियमों की जगह लागू किया गया.सुप्रीम कोर्ट ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी (2019) जैसे मामलों में सख्ती दिखाई थी. इन दोनों मामलों में जातिगत भेदभाव के आरोप लगे थे और छात्रों ने सुसाइड कर लिया था.जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुराने नियम कमजोर हैं, इसलिए सख्त और बाइंडिंग नियम बनाएं. UGC के डेटा के मुताबिक 2019-20 से 2023-24 तक जातिगत भेदभाव के केस 173 से 378 तक हो गए.इसलिए ये नियम NEP 2020 के तहत इक्विटी बढ़ाने के लिए लाए गए.
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मुख्य नियम क्या-क्या हैं?
ये नियम सभी UGC मान्यता वाले कॉलेज-यूनिवर्सिटी पर लागू हैं.
– हर इंस्टीट्यूशन में Equal Opportunity Centre (EOC)बनाना अनिवार्य होगा.ये कमेटी पिछड़े, वंचित छात्रों को पढ़ाई, फीस, हॉस्टल आदि में मदद देगी.
– Equity Committee (समता समिति)बनानी होगी.अध्यक्ष कॉलेज/यूनिवर्सिटी का हेड होगा. कमेटी में SC/ST, OBC, महिलाएं, दिव्यांग जरूर शामिल होंगे. कमेटी का कार्यकाल 2 साल होगा.
– Equity Squad भी बनेगा, जो कैंपस पर भेदभाव पर नजर रखेगा.
– भेदभाव की शिकायत आने पर 24 घंटे में मीटिंग होनी जरूरी है.
– 15 दिन में जांच रिपोर्ट हेड को देनी होगी.
– हेड को 7 दिन में कार्रवाई शुरू करनी होगी.
– EOC हर 6 महीने में रिपोर्ट देगा और कॉलेज को सालाना UGC को रिपोर्ट भेजनी होगी.
– UGC एक राष्ट्रीय निगरानी कमेटी बनाएगा.
– नियम न मानने पर कॉलेज या यूनिवर्सिटी का ग्रांट रोकने, नए डिग्री प्रोग्राम बंद करने या मान्यता रद्द के प्रावधान हैं. ये टाइमलाइन इसलिए सख्त है ताकि शिकायतें लटके नहीं और असल में एक्शन हो.






