फरक्‍का बैराज एग्रीमेंट क्‍या है? गंगा वाटर ट्रिटी से कितना अलग? भारत खोल दे गेट तो बांग्‍लादेश का क्‍या होगा?

India-Bangladesh Water Treaty: बांग्‍लादेश में शेख हसीना की अगुआई वाली लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार का तख्‍तापलट कर दिया गया. इसके बाद नोबेल पुरस्‍कार विजेता मोहम्‍मद यूनुस को बांग्‍लादेश की अंतरिम कमान सौंपी गई, ताकि हालात सामान्‍य कर मुल्‍क में चुनाव का माहौल बनाया जा सके. यूनुस ने सत्‍ता संभालते ही अपने सुर बदल लिए. उन्‍होंने भारत विरोधी स्‍टैंड लेना शुरू कर दिया. वे बीजिंग और इस्‍मालाबाद के करीब आने की जुगत में जुट गए. साथ ही भारत को उकसाने की कोशिश भी करने लगे. हालांकि, यूनुस इस बात से भली-भांति अवगत हैं कि नई दिल्‍ली के बिना ढाका में चूल्‍हा तक जलना मुश्किल हो जाएगा.

India-Bangladesh Water Treaty: 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो दुनिया में दो देशों का जन्‍म हुआ. भारत और पाकिस्‍तान. साल 1971 की जंग के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में एक और देश का उदय हुआ – बांग्‍लादेश. इस तरह भारत से कटकर दो देश इस दुनिया में अस्तित्‍व में आए – पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश. आज हालात ऐसे हैं कि दोनों देश भारत के दुश्‍मन बन बैठे हैं. ढाका में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्‍लादेश के सुर एकदम से बदल गए हैं. मोहम्‍मद यूनुस देश में लोकतंत्र की फिर से स्‍थापना करने के बजाय भारत से खुन्‍नस निकालने में जुटे हैं. यह जानते हुए भी कि बांग्‍लादेश तीन तरफ से भारत से घिरा है. एक तरफ बंगाल की खाड़ी है, जो भारत के लिए समुद्री आंगन की तरह है. ऐसे में बांग्‍लादेश का भारत के बिना गुजारा होना मुश्किल है.

कुछ दिनों पहले एक और रिपोर्ट आई कि जिस बांग्‍लादेश में पाकिस्‍तानियों ने कभी कत्‍लेआम मचाया था, यूनुस की अगुआई वाली सरकार उसी देश से फाइटर जेट खरीदने जा रहा है. ह‍र किसी के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि आर्थिक बदहाली का सामना कर रहे बांग्‍लादेश को आखिर फाइटर जेट खरीदने की जरूरत क्‍यों पड़ी? उसे किससे खतरा है? ढाका चीन से भी हथियार खरीदने की कोशिश में है. यूनुस की अगुआई वाली अंतरिम सरकार के इस कदम पर भारत की करीबी नजर है. बता दें कि भारत के हाथ में यूनुस के देश का टेंटुआ है. यदि भारत ने भूले से भी उसे दबाया तो राफेल और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और तकरीबन 35 लाख बांग्‍लादेशियों की जान हलक में आ जाएगी.


दरअसल, गंगा नदी भारत से होते हुए बांग्‍लादेश जाती है और फिर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है. गंगा नदी को बांग्‍लादेश में पद्मा के नाम से भी जाना जाता है. इस विशाल नदी के पानी के बंटवारे को लेकर भारत का बांग्‍लादेश के साथ दशकों पुराना समझौता है. दोनों देशों के बीच फरक्‍का बैराज एग्रीमेंट और गंगा जल समझौता (Ganga Water Treaty) है. इन दोनों करार का अपना अलग ही महत्‍व है. बता दें कि गंगा नदी भारत के लाखों-करोड़ों लोगों के लिए लाइफलाइन है. बांग्‍लादेश के भी लाखों लोगों के लिए गंगा नदी काफी अहम है.

Source of News:- News18.com

खेतीबारी से लेकर पीने के पानी तक के लिए गंगा नदी पर लाखों बांग्‍लादेशी निर्भर करते हैं. अब यदि बांग्‍लादेश का यही रवैया रहा और स्थिति टकराव तक पहुंचती है तो भारत के हाथ में ऐसा बटन है, जिसके दबाते ही बांग्‍लादेश में कोहराम मच जाएगा. लाखों लोगों के जीवन-यापन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा. एक ही झटके में पड़ोसी देश में त्राहिमाम मच जाएगा. फिर मोहम्‍मद यूनुस चाहकर भी अपने ही देशवासियों के लिए कुछ नहीं कर सकेंगे.

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