Bihar Politics 2026: बिहार की राजनीति एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी है जहां सवाल किसी चुनाव का नहीं, बल्कि एक पार्टी के भविष्य का है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति में रहते हुए भी यह सवाल अब टलने वाला नहीं दिखता कि- नीतीश कुमार के बाद जेडीयू कौन संभालेगा? समस्या भी स्पष्ट है क्योंकि जेडीयू में आज तक कोई घोषित उत्तराधिकारी नहीं है और यही अनिश्चितता पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है. ऐसे में वर्ष 2026 अपनी शुरुआत से ही इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है.
पटना. बिहार की राजनीति में इन दिनों शोर किसी चुनाव का नहीं, बल्कि एक खालीपन का है. यह खालीपन अभी दिख नहीं रहा, लेकिन इसकी आहट साफ सुनाई दे रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह दसवां कार्यकाल है और उनकी उम्र 74 पार कर चुकी है. उनके स्वास्थ्य को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं. ऐसे में एक सवाल अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर आम बातचीत का हिस्सा बन चुका है- नीतीश कुमार के बाद जेडीयू कौन संभालेगा? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि जेडीयू में आज तक कोई औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं हुआ है. दरअसल, पार्टी पूरी तरह नीतीश कुमार के व्यक्तित्व, फैसलों और सियासी कौशल पर टिकी रही है, ऐसे में जेडीयू की यही ताकत अब उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती दिख रही है.
जेडीयू की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली
जानकारों की नजर में जेडीयू की पहचान शुरू से एक नेता-केंद्रित पार्टी की रही है. संगठन कभी इतना मजबूत नहीं बन पाया कि नेतृत्व के बिना भी पार्टी अपनी दिशा तय कर सके. नीतीश कुमार ही चेहरा हैं, वही निर्णयकर्ता हैं और वही पार्टी की वैचारिक रीढ़ भी हैं. ऐसे में यह आशंका स्वाभाविक है कि नीतीश के बिना जेडीयू का चुनावी और सामाजिक आधार कमजोर पड़ सकता है. यही कारण है कि उत्तराधिकार का सवाल अब भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि वर्तमान का संकट बन चुका है. अब इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार का नाम बार-बार चर्चा में आता है. लेकिन, सवाल यह कि- क्या निशांत कुमार राजनीति में आ रहे हैं? अगर आ रहे हैं तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलू क्या होंगे?
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नेता-केंद्रित जेडीयू और संगठन की कमी
बता दें कि, निशांत कुमार अब तक राजनीति से दूर रहे हैं. न कोई चुनाव और न ही कोई संगठनात्मक भूमिका में कभी वो दिखे हैं. बावजूद इसके पार्टी के भीतर और बाहर यह चर्चा तेज है कि आने वाले समय में उन्हें धीरे-धीरे राजनीति में उतारा जा सकता है. चर्चा जारी है और राजनीति के जानकार मानते हैं कि निशांत कुमार की एंट्री अगर होगी तो वह अचानक नहीं, बल्कि एक ‘सॉफ्ट लॉन्च’ के तौर पर हो सकती है. पहले संगठन में भूमिका, फिर किसी सदन की सदस्यता और बाद में नेतृत्व की जिम्मेदारी. लेकिन, यहां असली सवाल यह नहीं है कि निशांत राजनीति में आएंगे या नहीं? बड़ा सवाल यह है कि क्या जेडीयू का कार्यकर्ता और वोटर उन्हें स्वीकार करेगा?








